बड़े भाग्य से ये मनुज तन मिला है
गवाते गवाते उमर पार कर दी..
खाने कमाने में आयु गवाई
यूं ही जिंदगी हमने बेकार कर दी..
अभी चेत जावत जो भी बचा है
अरे काल मुख से ना कोई बचा है..
जरा सोच ले साथ..2 ले जाएंगे क्या
यूं ही जिंदगी हमने है भार कर दी..
है संसार सागर में जीवन की नैया
है पतवार सत्कर्म सद्गुरु खेवईया..
माया के चक्कर में..2 फंस करके हमने
जीवन की नैया है मझधार कर दी..
अगर चाहत अपना तो कल्याण प्राणी
तो ले मान सच्चे सद्गुरु की वाणी..
लगे अपना जीवन..2 सत्कर्म में अब
अभी तक यह उम्र बेकार कर दी..
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